's अनहद में बिसराम – Anahad Mein Bisram (Hindi Edition) PDF

‘जात हमारी ब्रह्म है, माता-पिता है राम।
गिरह हमारा सुन्न में, अनहद में बिसराम।।’
"दरिया कहते हैं: एक ही बात याद रखो कि परमात्मा के सिवा न हमारी कोई माता है, न हमारा कोई पिता है। और ब्रह्म के सिवाय हमारी कोई जात नहीं। ऐसा बोध अगर हो, तो जीवन में क्रांति हो जाती है।तो ही तुम्हारे जीवन में पहली बार धर्म के सूर्य का उदय होता है।

‘गिरह हमारा सुन्न में।’
तब तुम्हें पता चलेगा कि शून्य में हमारा घर है। हमारा असली घर, जिसको बुद्ध ने निर्वाण कहा है, उसी को दरिया शून्य कह रहे हैं। परम शून्य में, परम शांति में, जहां लहर भी नहीं उठती, ऐसे शांत सागर में या शांत झील में, जहां कोई विचार की तरंग नहीं, वासना की कोई उमंग नहीं, जहां विचार का कोई उपद्रव नहीं, जहां शून्य संगीत बजता है, जहां अनाहत नाद गूंज रहा है—वहीं हमारा घर है।

‘अनहद में बिसराम।’
और जिसने उस शून्य को पा लिया, उसने ही विश्राम पाया। और ऐसा विश्राम जिसकी कोई हद नहीं है, जिसकी कोई सीमा नहीं है।"—ओशो

पुस्तक के कुछ विषय-बिंदु:
अनहद में बिसराम क्या है?
जीवन एक पाठशाला है
सम्यक ज्ञान का अर्थ
मन का अर्थ क्या होता है?

उद्धरण : अनहद में बिसराम - पहला प्रवचन - संसार पाठशाला है

"दरिया कहते हैं, एक ही बात याद रखो कि परमात्मा के सिवा न हमारी कोई माता है, न हमारा कोई पिता है। और ब्रह्म के सिवाय हमारी कोई जात नहीं।
ऐसा बोध अगर हो, तो जीवन में क्रांति हो जाती है। तो ही तुम्हारे जीवन में पहली बार धर्म के सूर्य का उदय होता है।

‘गिरह हमारा सुन्न में।’
तब तुम्हें पता चलेगा कि शून्य में हमारा घर है--हमारा असली घर! जिसको बुद्ध ने निर्वाण कहा है, उसी को दरिया शून्य कह रहे हैं। परम शून्य में, परम शांति में, जहां लहर भी नहीं उठती, ऐसे शांत सागर में या शांत झील में, जहां कोई विचार की तरंग नहीं, वासना की कोई उमंग नहीं, जहां विचार का कोई उपद्रव नहीं, जहां शून्य संगीत बजता है, जहां अनाहत नाद गूंज रहा है--वहीं हमारा घर है।

अनहद में बिसराम।’
और जिसने उस शून्य को पा लिया, उसने ही विश्राम पाया। और ऐसा विश्राम जिसकी कोई हद नहीं है, जिसकी कोई सीमा नहीं है।
‘अनहद में बिसराम।’ यही संन्यासी की परिभाषा है। ‘गिरह हमारा सुन्न में, अनहद में बिसराम।’
यह संन्यासी की पूरी परिभाषा आ गई। मगर इसके लिए जरूरी है कि हम जानें:
‘जात हमारी ब्रह्म है, माता-पिता है राम।’
मैं अपने संन्यासी को न तो ईसाई मानता हूं, न हिंदू, न मुसलमान, न जैन, न बौद्ध। मेरा संन्यासी तो सिर्फ शून्य की खोज कर रहा है। सारी दीवारें गिरा रहा है। मेरा संन्यासी तो अनहद की तलाश में लगा है, सीमाओं का अतिक्रमण कर रहा है। घर छोड़ना नहीं है। घर में रहते ही जानना है कि घर मेरी सीमा नहीं है। परिवार छोड़ना नहीं है। परिवार में रहते ही जानना है कि परिवार मेरी सीमा नहीं है। बस, यह बोध! इस बोध को ध्यान कहो, जागरण कहो, विवेक कहो, सुरति कहो; जो भी शब्द तुम्हें प्रीतिकर हो, वह कहो। लेकिन इसे लक्ष्य समझो कि पहुंचना है शून्य में; तभी तुम्हें विश्राम मिलेगा। नहीं तो जीवन एक संताप है, एक पीड़ा है, एक विरह है। विरह की अग्नि! इसमें हम झुलसे जाते हैं; थके जाते हैं; टूटे जाते हैं; बिखरे जाते हैं; उखड़े जाते हैं। हमारे पत्ते-पत्ते कुम्हला गए हैं; फूलों के खिलने की तो बात बहुत दूर, हमारी जड़ें सूखी जा रही हैं। और जैसे ही किसी ने शून्य में अपनी जड़ें जमा लीं, तत्क्षण हरियाली छा जाती है; फूल उमग आते हैं; वसंत आ जाता है। बहार आ जाती है। फूलों में गंध आ जाती है। भंवरे गीत गाने लगते हैं। मधुमक्खियां गुंजार करने लगती हैं।

उस उत्सव की घड़ी में ही जानना कि जीवन कृतार्थ हुआ है।"—ओशो

Show description

Read Online or Download अनहद में बिसराम – Anahad Mein Bisram (Hindi Edition) PDF

Best philosophy books

New PDF release: Manual of Zen Buddhism

Listed here are the well-known sutras, or sermons, of the Buddha, the gathas, or hymns, the exciting philosophical puzzles referred to as koan, and the dharanis, or invocations to expel evil spirits. integrated are also the recorded conversations of the nice Buddhist monks—intimate dialogues at the topics of momentous significance.

New PDF release: The pragmatic theory of truth as developed by Peirce, James,

This publication was once switched over from its actual variation to the electronic structure by way of a group of volunteers. you'll locate it at no cost on the net. buy of the Kindle version comprises instant delivery.

Comprendre le Moyen-Age: Les textes de Dante, Chrétien de - download pdf or read online

Intolérant et obscurantiste, le Moyen Age ? Que peuvent nous apporter aujourd'hui Abélard, Anselme ou Bernard de Clairvaux ? C'est pour en finir avec le cliché d'un Moyen Âge, trou noir de l'histoire occidentale, que Le element Références présente ici les textes les plus importants de cette période gaie et sensuelle, riche en échanges et dont l. a. subtilité intellectuelle encourage aujourd'hui les plus grands intellectuels, qu'ils soient historiens, philosophes ou spécialistes de los angeles body quantique.

Download e-book for kindle: The Path: What Chinese Philosophers Can Teach Us About the by Michael Puett,Christine Gross-Loh

For the 1st time, an award-winning Harvard professor stocks his wildly renowned path on classical chinese language philosophy, exhibiting you ways old ideas—like the fallacy of the real self—can advisor you at the route to a superb lifestyles at the present time. Why is a path on historical chinese language philosophers essentially the most well known at Harvard?

Extra resources for अनहद में बिसराम – Anahad Mein Bisram (Hindi Edition)

Example text

Download PDF sample

अनहद में बिसराम – Anahad Mein Bisram (Hindi Edition)


by Brian
4.2

Rated 4.02 of 5 – based on 5 votes